Monday, 1 October 2018

Shayari


ऐ वक्त तुम्हें दोस्त कैसे कहें
ना ठेहेरते हो ना वापस आते हो
और दर्द को ही देख लो.


तन का रंग तो छुटेगा
मन रंगा रंगरेज़
दिल है सुना सुना सा
तू बैठा परदेस ....


किस हक से चले आते हो खयालों में यूंही -
जान जाती है हमारी ...
फिर मुस्कुराकर चले जाते हो
कहते हो, बस यूंही ....


ओस की बूंद सी हूं - 
मुश्किल से ठहर पायी हूं कहीं 
पाती बन सको तो देख लो
वर्ना अब हूं , अब नहीं.....


किस हक से चले आते हो खयालों में यूंही -
जान जाती है हमारी ...
फिर मुस्कुराकर चले जाते हो 
कहते हो, बस यूंही ....

लफ्जों को खूब सजाते हो
काश खामोशियाँ समझ पाते !
कभी आखें ही पढ लेते हमारी
तो हम भी जिंदगी जी लेते.....



कहीं लब्ज़ सहम गए
कभी पलकें झुकी रही -
अनकही- सी इक दास्ताँ
फासलों में बसी रही.

तुम्हारे खयालों से आज भी
चहक उठती है मेरी तन्हाई
नादान है वो क्या जाने
हकीकत और तमन्ना- है सदियों से बिछडी हुईं
हर कोशिश, हर साज़िश, तुमसे मिलने की है 
हर ख्वाईश मेरी तेरे दीदार की है.....
फिर भी ना मिल पाये कभी तो कोई शिकवा नहीं
परवाने की तक़्दीर तो जल जाने की है.....

बहोत दूर छोड़ आये तुम्हें , 
अब तो राहें भी धुन्दला गयी ....
किसी मोड़ पे मिल जाओ कभी,गैरमुमकिन है , 
अब तो मंजिले भी तनहा हुई ....

खाव्बों के आइने में कब तक निहारोगे....
कोई एक भी टूट जाये, क्या सँवर पाओगे ??

किसी गलती की सज़ा उम्र भर क्यों हो 
इक सज़ा की उम्र जिन्दगी भर ना हो 
इन्तहा इश्क का मुक्कम्मल क्या हो 
मौत बेहतेरीन है , जिंदगी ना हो ....


तन का रंग तो छुटेगा 
मन रंगा रंगरेज़
दिल है सुना सुना सा
तू बैठा परदेस ....


तन का रंग तो छुटेगा 
मन रंगा रंगरेज़
दिल है सुना सुना सा
तू बैठा परदेस ....


तन का रंग तो छुटेगा 
मन रंगा रंगरेज़
दिल है सुना सुना सा
तू बैठा परदेस ....

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