जा ले जा थाल इन रंगों का
सीरत है इनकी झूठी !
रंग गुलाल दे पायेगा
रात मिलन की लाली ?!
सीरत है इनकी झूठी !
रंग गुलाल दे पायेगा
रात मिलन की लाली ?!
पीला रंग भी फिका फिका -
पीली तो वो थी हल्दी,
उसके तन जो छू आयी
फिर रंग दी मुझको गहरी !
पीली तो वो थी हल्दी,
उसके तन जो छू आयी
फिर रंग दी मुझको गहरी !
हरा रंग भी नहीं है कौनो
ला दे वो हरियाली -
हौले हौले सरकी थी जब
सर से चुनरी धानी ...
ला दे वो हरियाली -
हौले हौले सरकी थी जब
सर से चुनरी धानी ...
जा जा रे फागुन,
मैं ना तेरी बातों में आने वाली!
उसके रंग में रंगी हूँ ऐसे
धवल धवल तेरी होरी.....
मैं ना तेरी बातों में आने वाली!
उसके रंग में रंगी हूँ ऐसे
धवल धवल तेरी होरी.....
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