Thursday, 12 March 2020

Radha - Meera

जो मीरा है अधूरी
तो राधा भी कहाँ पूरी
पर बसा दोनों के मन में है जो
वो ग्वाला पूर्ण सखी री...
जो मीरा ने विष पिया
तो राधा भी रही प्यासी
पर चाहा अम्रित दोनों ने जिससे
नाम उसका गिरधारी
जो मीरा भई बैरागी
तो राधा कहाँ बिहाई
पर रंगा दोनों को सिंदुरी जिसने
वो नील रंग निरमोही
बसा दोनों के तन मन में जो-
वो कान्हा है हरजाई
शाम नाम दोनों के मुख में-
होठों से उसने बंन्सी लगायी .....

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