कुछ होता गर बीच हमारे
तो शायद कुछ ऐसा होता
मिसाले मोहब्बत के पन्नों में
बस आपका और हमारा नाम होता
तो शायद कुछ ऐसा होता
मिसाले मोहब्बत के पन्नों में
बस आपका और हमारा नाम होता
मिलकर ठहरी थी जो नजर कुछ पल....
दो लब्जों को कलम कर जाती
बेझिजक किसी खय्याम की
रूबाई को आजमा आती
दो लब्जों को कलम कर जाती
बेझिजक किसी खय्याम की
रूबाई को आजमा आती
वो रास्ता जो साथ चलें थे
इश्के-मंजिल के शहर जाता....
हमारी इबादत का सबूत देख
कोई शहनसाह भी नजर झुकाता
इश्के-मंजिल के शहर जाता....
हमारी इबादत का सबूत देख
कोई शहनसाह भी नजर झुकाता
कम्बख्त जो गुजर चुका है
वो हसीन दौर लौट आता.....
किसी मधुशाला के पैमाने में
कसम है वो नशा होता !
वो हसीन दौर लौट आता.....
किसी मधुशाला के पैमाने में
कसम है वो नशा होता !
कुछ होता गर बीच हमारे
तो शायद कुछ ऐसा होता ......
तो शायद कुछ ऐसा होता ......
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