है तेरी मरजी या किस्मत की ख्वाईश
खुदके जनाजे में हम है
हो तुम जो रूठे तो धडकन भी ऐठें
साँसों का क्या है कुसूर...
खुदके जनाजे में हम है
हो तुम जो रूठे तो धडकन भी ऐठें
साँसों का क्या है कुसूर...
मन मेरा तेरा था, खुशियों का आंगन था
मेहेका सा हर एक कोना ,
गमला गर फूटा, तो काँटों ने लूटा
भंवरे का क्या है कुसूर....
मेहेका सा हर एक कोना ,
गमला गर फूटा, तो काँटों ने लूटा
भंवरे का क्या है कुसूर....
उजडा ये आलम है, हर पल जो खोया है
ढूंडे उसे कैसे हम
जो साथ छूटा तो हर ख्वाब टूटा
पलकों का क्या है कुसूर....
ढूंडे उसे कैसे हम
जो साथ छूटा तो हर ख्वाब टूटा
पलकों का क्या है कुसूर....
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